मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के कुशल नेतृत्व में उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने सड़क सुरक्षा, राजस्व वसूली और यातायात नियमों के प्रभावी अनुपालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चिन्हित संभागों में विशेष प्रवर्तन अभियान ‘मिशन आरोही’ संचालित किया है। चार दिनों तक चले इस मेगा प्रवर्तन अभियान में विभागीय टीमों ने सड़कों पर सक्रिय मौजूदगी दर्ज कराते हुए नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के विरुद्ध व्यापक एवं सख्त कार्रवाई की।
‘मिशन आरोही’ का उद्देश्य केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं था, बल्कि प्रवर्तन कार्यवाही के माध्यम से राजस्व प्राप्ति में वृद्धि, बकाया राजस्व की वसूली, ओवरलोडिंग पर प्रभावी नियंत्रण, अनधिकृत यात्री वाहनों के संचालन पर रोक तथा सड़क पर विभागीय प्रवर्तन की प्रभावशीलता को लगातार बढ़ाना था। इस अभियान को सफल बनाने के लिए कानपुर, प्रयागराज, झांसी, बांदा, आगरा और लखनऊ संभाग के प्रवर्तन अधिकारियों एवं टीमों ने फील्ड में रहकर सुनियोजित रणनीति के साथ कार्य किया। टीमों ने यात्री एवं माल वाहनों की सघन जांच की और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की।
कार्यवाही से मिली सफलता
प्रदेश में चार दिनों की संचालित इस विशेष प्रवर्तन मुहिम के दौरान विभिन्न अभियोगों में कुल 3,899 वाहनों के चालान किए गए, जबकि 862 वाहनों को थानों में निरुद्ध किया गया। अभियान के परिणामस्वरूप विभाग को लगभग 442.46 लाख रुपये के बकाया राजस्व/कर एवं जुर्माने की प्राप्ति हुई। अभियान के दौरान प्रवर्तन टीमों ने यह संदेश स्पष्ट किया कि सड़क पर नियमों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। ओवरलोडिंग, अनधिकृत यात्री वाहनों के संचालन और अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन के विरुद्ध की गई कार्रवाई ने न केवल विभाग की प्रवर्तन क्षमता को प्रदर्शित किया, बल्कि सड़क सुरक्षा के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता को भी मजबूत किया। ‘मिशन आरोही’ की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि प्रवर्तन कार्यवाही को परिणामों से जोड़ा गया, जहां एक ओर नियम तोड़ने वाले वाहनों पर सख्ती हुई, वहीं दूसरी ओर बकाया राजस्व की प्रभावी वसूली भी सुनिश्चित हुई।
टीमवर्क बना सफलता की कुंजी
अभियान की सफलता के पीछे प्रवर्तन अधिकारियों और फील्ड टीमों का समन्वित प्रयास महत्वपूर्ण रहा। अधिकारियों ने लगातार सड़कों पर मौजूद रहकर कार्रवाई को गति दी और अभियान को परिणामजन्य बनाने के लिए रणनीति के अनुरूप कार्य किया। अभियान के सफल संपादन पर प्रवर्तन टीमों के प्रयासों की सराहना की गई। ‘मिशन आरोही’ ने यह साबित किया कि सुनियोजित रणनीति, मजबूत फील्ड उपस्थिति और निरंतर प्रवर्तन कार्रवाई के माध्यम से राजस्व वसूली के साथ-साथ सड़क सुरक्षा के लक्ष्य को भी प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सकता है।
सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और आमजन की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए ऐसी प्रभावी प्रवर्तन कार्यवाहियों को नियमित एवं व्यापक स्वरूप देने की आवश्यकता को दृष्टिगत ‘मिशन आरोही’ इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है। यह अभियान केवल चार दिनों की कार्रवाई नहीं, बल्कि सुरक्षित सड़कों, जिम्मेदार वाहन संचालन और नियमों के प्रति जवाबदेही की दिशा में बढ़ते कदमों को प्रदर्शित करता है।
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-आशीष सिंह, अनुवादक
पत्र सूचना शाखा
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश
सफलता की कहानी
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग
मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान से अमेठी की शिव दुलारी ने पायी स्वरोजगार और स्वावलंबन की राह
दिनांकः 27 सितम्बर, 2026
उत्तर प्रदेश को आर्थिक रूप से सशक्त और स्वावलंबी बनाने के ध्येय से प्रदेश सरकार द्वारा संचालित ’मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ (सीएम-युवा) राज्य के युवाओं एवं महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बन रहा है। शिक्षित और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार प्रदाता के रूप में स्थापित करने की दिशा में यह योजना नीतिगत और व्यावहारिक स्तर पर ठोस परिणाम दे रही है। इस अभियान के अंतर्गत आगामी 10 वर्षों में 10 लाख नवीन सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने का सुविचारित लक्ष्य तय किया गया है, जिसके क्रम में प्रतिवर्ष एक लाख पात्र अभ्यर्थियों को उद्यम स्थापना हेतु वित्तीय एवं संस्थागत संबल उपलब्ध कराया जा रहा है। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की नवीन सूक्ष्म परियोजनाओं को प्राथमिकता देते हुए यह कार्यक्रम ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर नए आर्थिक अवसर सृजित कर रहा है।
योजना की वित्तीय संरचना को अत्यंत व्यावहारिक और सुलभ बनाया गया है। प्रथम चरण में अधिकतम 5 लाख रुपये तक का शत-प्रतिशत ब्याजमुक्त और संपार्श्विक (कोलैटरल) मुक्त ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इसके साथ ही परियोजना लागत पर मार्जिन मनी सहायता भी प्रदान की जा रही है। ऋण सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार के क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (सीजीटीएमएसई) का आवरण सुनिश्चित किया गया है, जिससे नवउद्यमियों को बिना किसी अचल संपत्ति को बंधक रखे बैंकिंग तंत्र से सुगमतापूर्वक पूंजी प्राप्त होती है। उद्यमों के सतत विकास और स्थायित्व को दृष्टिगत रखते हुए इसमें द्वि-स्तरीय सहयोग का प्रावधान है। प्रथम चरण के ऋण का समयबद्ध पुनर्भुगतान सुनिश्चित करने वाले सफल उद्यमियों को व्यवसाय विस्तार एवं आधुनिकीकरण हेतु द्वितीय चरण में 10 लाख रुपये तक की वित्तीय सुविधा और उस पर अनुदान का लाभ दिया जाता है।
इस योजना के दायरे में 21 से 40 वर्ष आयु वर्ग के वे सभी युवा शामिल हैं, जिन्होंने न्यूनतम आठवीं कक्षा उत्तीर्ण की हो, जिसमें राज्य प्रायोजित कौशल प्रशिक्षण अथवा मान्यता प्राप्त तकनीकी संस्थानों से प्रमाणित युवाओं को वरीयता दी जा रही है। इस राज्यव्यापी नीति का अत्यंत सकारात्मक और व्यवस्थित क्रियान्वयन जनपद अमेठी में देखने को मिल रहा है। जनपद में जिला प्रशासन के सतत पर्यवेक्षण में उद्योग विभाग और अग्रणी बैंकों के समन्वय से आवेदन से लेकर ऋण स्वीकृति तक की संपूर्ण प्रक्रिया को पारदर्शी एवं गतिमान बनाया गया है। विकास खंड और नगरीय निकाय स्तर पर जागरूकता शिविरों के माध्यम से पात्र युवाओं को डिजिटल पोर्टल से जोड़ने का कार्य निरंतर जारी है।
जनपद अमेठी के मुख्यालय गौरीगंज की निवासी शिव दुलारी की सफलता इस योजना के मैदानी प्रभाव का एक सशक्त उदाहरण है। सीमित पारिवारिक आय और आर्थिक चुनौतियों के बीच कार्यकुशलता होने के बावजूद पूंजी का अभाव उनके स्वतंत्र व्यवसाय की राह में मुख्य बाधा था। वर्ष 2025 में उन्होंने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के अंतर्गत ऑनलाइन आवेदन किया। प्रशासनिक स्तर पर सत्यापन और विभागीय संस्तुति के उपरांत भारतीय स्टेट बैंक द्वारा शिव दुलारी को 5 लाख रुपये का ब्याजमुक्त ऋण स्वीकृत किया गया। वित्तीय संसाधन उपलब्ध होते ही उन्होंने गौरीगंज में ’रेडीमेड गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट’ की स्थापना की। पूंजीगत सहायता ने आधुनिक सिलाई मशीनरी और प्रारंभिक कच्चे माल की व्यवस्था को सुलभ बनाया, जिससे इकाई का परिचालन सुचारु रूप से प्रारंभ हो सका।
शुरुआत में स्थानीय मांग के अनुरूप सीमित परिधानों के निर्माण से कार्य प्रारंभ करने वाली इस इकाई ने गुणवत्ता और समयबद्ध आपूर्ति के बल पर त्वरित विस्तार किया। वर्तमान में इस विनिर्माण इकाई में आधुनिक डिजाइन और दैनिक उपयोग के विभिन्न रेडीमेड परिधान तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी खपत अमेठी के स्थानीय बाजारों के साथ-साथ समीपवर्ती ग्रामीण हाटों और खुदरा दुकानों में सफलतापूर्वक हो रही है। इस उद्यम की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि व्यक्तिगत स्वावलंबन से आगे बढ़कर सामाजिक दायित्व का निर्वहन है। शिव दुलारी की इस इकाई में वर्तमान में चार स्थानीय व्यक्तियों को नियमित और सवेतन रोजगार प्राप्त हो रहा है। इससे न केवल संबंधित कामगारों के परिवारों को नियमित आजीविका का सुरक्षा चक्र मिला है, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं में भी उद्यमशीलता के प्रति आत्मविश्वास का संचार हुआ है।
अमेठी जनपद में सूक्ष्म विनिर्माण इकाइयों का यह उभार स्थानीय अर्थव्यवस्था को बहुआयामी संबल प्रदान कर रहा है। यह पहल स्थानीय उत्पादों, कारीगरों और ’एक जनपद एक उत्पाद’ (ओडीओपी) से जुड़ी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने में सहायक सिद्ध हो रही है। उत्पादन गतिविधियों के स्थानीयकरण से कच्चे माल के व्यापार, परिवहन और खुदरा बिक्री में तेजी आई है, जिससे ग्रामीण बाजार में नकदी प्रवाह सुदृढ़ हुआ है। जनपद स्तर पर इस प्रकार के सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना का एक प्रत्यक्ष परिणाम शिक्षित और हुनरमंद श्रमशक्ति के पलायन पर प्रभावी नियंत्रण के रूप में सामने आया है। जब युवाओं को अपने गृह क्षेत्र में ही सम्मानजनक कार्य और आजीविका के साधन उपलब्ध होते हैं, तो इससे न केवल स्थानीय स्तर पर मानव संसाधन का संरक्षण होता है, बल्कि कस्बाई क्षेत्रों का समग्र सामाजिक-आर्थिक संतुलन भी बेहतर होता है।
मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान वस्तुतः युवाओं की आकांक्षाओं को उत्पादक आर्थिक शक्ति में परिवर्तित करने का एक प्रभावी तंत्र है। जनपद अमेठी में शिव दुलारी जैसी तमाम महिला उद्यमी सरकार की इस योजना का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर होने की दिशा में आगे बढ़ चुकी हैं। यह अभियान प्रदेश के औद्योगिक और सामाजिक विकास को एक नई ऊंचाई प्रदान कर रहा है।
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सूचनाधिकारी जनपद अमेठी/
डा0 सीमा गुप्ता (से0नि0 सहा0निदे0)


