उत्तर प्रदेश

प्रदेश में 121 चीनी मिलें संचालित, 64 में कोजनरेशन और 53 में एथनॉल प्लांट : लक्ष्मी नारायण चौधरी

प्रदेश स्तर पर बसंतकालीन बुवाई के लिए 14.48 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया, जिसके सापेक्ष 8.71 लाख हेक्टेयर मे लगभग 60 प्रतिशत गन्ना बुवाई सफलतापूर्वक पूर्ण की जा चुकी है। पिछले वर्ष कुल लक्ष्य 13.55 लाख हेक्टेयर के विरूद्ध इसी अवधि में कुल गन्ना बुवाई 7.50 लाख हेक्टेयर थी । प्रदेश में पहली बार गन्ना बीज प्रबंधन को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए 6.90 करोड़ कुन्तल शुद्ध बीज आरक्षित कर उसे ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किसानों के लिए उपलब्ध कराया गया है। एसएमएस सेवा एवं एसजीके पोर्टल के जरिए किसानों को निकटतम बीज उपलब्धता की सूचना दी जा रही है, एस.जी.के. पोर्टल पर बीज उपलब्धता का टैब देकर प्रदेश के ऐसे सभी गन्ना किसान जिसके यहाँ शुद्ध बीज है, विभागीय पोर्टल पर उपलब्ध करायी गयी है। इसे एक क्लिक पर कोई भी गन्ना किसान घर बैठे वांछित गन्ना किसानों से मोबाइल के माध्यम से बीज प्राप्त कर सकता है।

प्रदेश के गन्ना किसानों को उन्नत एवं उच्च उत्पादकता वाली गन्ना किस्में उपलब्ध कराने के लिए अनेक नई गन्ना प्रजातियां जैसे-को.शा.18231. को.शा.17231, को.शा. 13235, को. लख. 16201, को. लख. 16202, को. लख. 14201, को.0118, को. 15023, को.शा. 19231, को.से.17451, को. से. 17018 एवं को.से.18022 आदि अवमुक्त की गयी है। इसके साथ ही बीज की शुद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु व्यापक स्तर पर खड़े गन्ने का सत्यापन अभियान चलाया गया, साथ ही विभागीय एवं मिल के कर्मियों को विशेषज्ञ वैज्ञानिकों द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिससे खड़े खेत में गन्ने की किस्मों की सही पहचान और गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित हो सके। सत्यापन के अन्तर्गत 30,067 हेक्टेयर अप मिश्रित किस्मों तथा 17,126 हेक्टेयर अस्वीकृत किस्मों का क्षेत्रफल चिन्हित किया गया।

बीज की उपलब्धता और गुणवत्ता पर सतत निगरानी के लिए “सीड ट्रैक एंड ट्रैस” ऐप विकसित किया जा रहा है, जिससे बीज वितरण में अनियमितताओं पर पूर्ण अंकुश लगेगा। गन्ना क्षेत्रफल एवं फसल की सटीक जानकारी हेतु नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर के सहयोग से सैटेलाइट आधारित परियोजना संचालित की जा रही है, इसके अन्तर्गत गन्ना क्षेत्रफल के आकलन के साथ ही साथ किस्मों एवं रोग की पहचान का भी पाइलट अध्ययन किया जा रहा है। महिला सशक्तिकरण के अन्तर्गत 3,184 स्वयं सहायता समूहों की लगभग 60,000 महिलाएं गन्ना नर्सरी तैयार कर रही हैं, जिससे उन्हें रोजगार के साथ-साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता भी प्राप्त हो रही है। गन्ना बुवाई के लक्ष्य प्राप्ति सुनिश्चित करने एवं प्रगति की समीक्षा हेतु मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा 04 दिवसीय क्षेत्र भ्रमण किया गया।

चीनी मिलों एवं विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे गन्ना किसानों के प्रोत्साहन के लिए उन्हें बीज, परिवहन, उर्वरक, कीटनाशक एवं अन्य कृषि निवेशों में अधिकतम सहायता प्रदान करें। गन्ना बीज एवं बीज यातायात हेतु 94 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। इसके अतिरिक्त, कृषि ड्रोन के माध्यम से फसल में दवा का छिड़काव तेजी और सटीकता से किया जा रहा है, जो किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहा है। पहली बार 01 लाख 48 हजार छोटी जोत वाली महिला गन्ना किसानों को गन्ना आपूर्ति में प्राथमिकता प्रदान की गयी है, जिससे उन्हें गौरव एवं सम्मान की अनुभूति प्राप्त हो रही है।

उत्तर प्रदेश में कुल 121 चीनी मिलें कार्यरत हैं। इन चीनी मिलों में से 64 चीनी मिलों में 2,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन करने वाली कोजन इकाइयाँ स्थापित हैं। इसके अतिरिक्त 53 चीनी मिलों में एथनॉल प्लाण्ट स्थापित है, जिनकी उत्पादन क्षमता 258.67 करोड़ लीटर प्रतिवर्ष है। गन्ना विभाग द्वारा 148 सहकारी गन्ना एवं चीनी मिल समितियों में फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किये गये, जिसमें 78 टैªक्टर एवं गन्ना खेती के लिए उपयोगी 979 कृषि यंत्र रखे गये हैं। आगामी वर्ष में इन फार्म मशीनरी बैंकों में गन्ना कटाई के मशीनीकरण हेतु मिनीकेन हार्वेस्टर एवं कृषि ड्रोन भी शामिल किया जाना प्रस्तावित है। 04 नई चीनी मिलों यथा-पिपराइच, मुण्डेरवा, चांगीपुर, त्रिवटीनाथ की स्थापना की गई तथा 42 चीनी मिलों में क्षमता विस्तार किया गया है। 06 बंद चीनी मिलों का पुर्नसंचालन-वीनस (सम्भल), गागलहेड़ी, विडवी, वेब (बुलंदशहर), बघौली (हरदोई), टोडरपुर (सहारनपुर)। 04 नई चीनी मिलों की स्थापना (20,000 टी.सी.डी.), 06 चीनी मिलों का पुर्नसंचालन (25,500 टी.सी.डी.) तथा 42 चीनी मिलों का क्षमता विस्तार (79,000 टी.सी.डी.) किया गया है। इस प्रकार विगत 09 वर्षों में कुल 44 परियोजनाओं के अन्तर्गत कुल 1,24,500 टी.सी.डी. अतिरिक्त पेराई क्षमता का सृजन हुआ है। रू.220 करोड़ की लागत से 02 चीनी मिलों अजबापुर (खीरी), रोहानाकलां (मुजफ्फरनगर) सी०बी०जी० प्लांट (कम्प्रेस्ड बायोगैस) स्थापित हुए। बलरामपुर चीनी मिल लि० कुम्भी (खीरी) पी.एल.ए. बायोप्लास्टिक बनाने का संयंत्र रू.2,850 करोड़ की लागत से तैयार किया जा रहा है। हरियांवा चीनी मिल में डिस्टलरी की राख से पोटेशियम सल्फेट बनाने का प्लांट स्थापित किया गया है, जो अपनी तरह का विश्व का पहला संयंत्र है। इस प्रकार उपर्युक्त परियोजनाओं के अधीन विगत 09 वर्षों में शुगर सेक्टर में रू.8,126 करोड़ एवं खाण्डसारी सेक्टर में रू.1,241 करोड़ सहित इस सेक्टर में लगभग कुल रू.9,367 करोड़ का पूंजी निवेश हुआ है।

प्रदेश सरकार ने गन्ना किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए अपने वर्तमान कार्यकाल में 3,19,223 करोड़ रुपये का अभूतपूर्व गन्ना मूल्य भुगतान सुनिश्चित किया है, जो वर्ष 2007 से 2017 तक की पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा किए गए कुल 1,47,346 करोड़ रुपये के भुगतान की तुलना में 1,71,877 करोड़ रुपये अधिक है। यह उपलब्धि न केवल सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि प्रदेश के लाखों गन्ना किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वर्तमान पेराई सत्र में 121 चीनी मिलों का सुचारु संचालन किया जा रहा है, जिनके माध्यम से अब तक 858 लाख कुन्तल गन्ने की पेराई कर 87.56 लाख टन चीनी का उत्पादन किया जा चुका है। उत्पादन में यह वृद्धि प्रदेश के औद्योगिक और कृषि विकास का प्रतीक है।

सहकारी चीनी मिलों की कार्यप्रणाली में सुधार एवं तकनीकी उन्नयन के कारण उत्पादित चीनी की गुणवत्ता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे उनकी बाजार में साख मजबूत हुई है। इसका प्रत्यक्ष परिणाम यह रहा कि गत वर्ष 73.17 लाख कुन्तल चीनी विक्रय के मुकाबले इस वर्ष 97.3 लाख कुन्तल चीनी का विक्रय हुआ, जिससे राजस्व में वृद्धि हुई और किसानों को गन्ना मूल्य का त्वरित एवं समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जा सका है। इसके अतिरिक्त, विभाग द्वारा नये भवनों, कार्यालय भवनों की आधारभूत संरचना के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसके अंतर्गत 78 करोड़ रुपये की 49 परियोजनाएं शिलान्यास हेतु तथा 55 करोड़ रुपये की 34 परियोजनाएं लोकार्पण हेतु चिन्हित की गई हैं, जो विभागीय कार्यक्षमता को और सुदृढ एवं सरल बनायेंगी।

गन्ना किसान को आवश्यक सुविधायें उपलब्ध कराना राज्य सरकार की विशेष प्राथमिकता मानते हुए मा. गन्ना मंत्री द्वारा चीनी मिलों को निर्देश दिये कि गन्ना के विकास में हाथ बटाये तथा गन्ना किसानों हेतु खेती के लिये उपयोगी कृषि यंत्रों यथा-ट्रेंच प्लांटर, छोटे ट्रैक्टर, पावर स्प्रेयर, नैपसैक स्प्रेयर, तथा अन्य कृषि निवेशों बीज, खाद, उर्वरक, बायो कम्पोस्ट, पेस्टीसाइड आदि ऋण एवं अनुदान पर उपलब्ध करावें।

बैठक में मंत्री, चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग लक्ष्मी नारायण चौधरी, अपर मुख्य सचिव, चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के साथ संयुक्त प्रबंध निदेशक, उ.प्र. सहकारी चीनी मिल संघ लि. तथा विभाग के समस्त वरिष्ठ अधिकारीगण, निदेशक गन्ना शोध परिषद, चीनी मिल प्रतिनिधियों के साथ मीडिया के सहयोगी भी उपस्थित रहे।

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