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भारत-रूस टेक्नोलॉजी साझेदारी: उपकरण स्थानीयकरण और एसएमआर निर्माण पर फोकस

परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा सुधार: परमाणु ऊर्जा विधेयक 2025 मसौदा अंतिम चरण में

परमाणु ऊर्जा विभाग और रोसाटॉम के बीच एक बैठक हुई जिसमें बड़े और छोटे पैमाने के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए परियोजनाओं का विकास और परमाणु ईंधन चक्र में सहयोग जैसे परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। विशेष रूप से, भारत में उपकरण उत्पादन के स्थानीयकरण के अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया गया। सहयोग के लिए चर्चा के नए क्षेत्रों में से एक भारत में रूसी डिजाइन के छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (एसएमआर) का निर्माण शामिल है।

परमाणु ऊर्जा मिशन के लिए बजट 2025-26 की घोषणा में, 2033 तक पांच स्वदेशी एसएमआर के विकास और तैनाती पर जोर दिया गया है, जिसका परिव्यय 20,000 करोड़ रुपये है।

बीएआरसी ने एसएमआर पर डिजाइन और विकास कार्य शुरू किया है,

    1. 200 मेगावाट भारत लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (बीएसएमआर-200),
    2. 55 मेगावाट लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर-55), और
    1. 5 मेगावाट तक उच्च तापमान गैस कूल्ड रिएक्टर हाइड्रोजन उत्पादन के लिए है।

प्रौद्योगिकी प्रदर्शन के लिए इन रिएक्टरों की प्रमुख इकाइयों का निर्माण परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) के स्थल पर करने का प्रस्ताव है। परियोजना की स्वीकृति मिलने के बाद, डिमोंस्‍ट्रेशन रिएक्टरों का निर्माण 60 से 72 महीनों में होने की संभावना है।

उद्योगों द्वारा निजी इस्‍तेमाल हेतु भारत लघु रिएक्टरों (बीएसआर) के संबंध में, एनपीसीआईएल ने सरकार द्वारा अनुमोदित व्यावसायिक मॉडल के अनुरूप 31 दिसंबर, 2024 को प्रस्ताव हेतु अनुरोध (आरएफपी) किया। फरवरी 2025 में एक प्रस्ताव-पूर्व बैठक आयोजित की गई, जहां इच्छुक उद्योगों के प्रश्नों का समाधान किया गया। विभिन्न इच्छुक उद्योगों द्वारा उठाए गए सभी प्रश्नों पर स्पष्टीकरण संकलित किए गए और एनपीसीआईएल की वेबसाइट पर पोस्ट किए गए। इसके अलावा, उद्योगों के अनुरोधों के आधार पर, आरएफपी जमा करने की अंतिम तिथि 31 मार्च, 2026 तक बढ़ा दी गई है।

परमाणु ऊर्जा विधेयक 2025 का मसौदा वर्तमान में प्रक्रिया और तैयारी के उन्नत चरण में है, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों की अंतिम टिप्पणियों और सुझावों को क्रमिक रूप से शामिल किया जा रहा है, साथ ही विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा कानूनी अनुपालन हेतु इसकी जांच भी की जा रही है। विधेयक के विशिष्ट पहलुओं के संबंध में सरकार के नीतिगत निर्देशों को अनुमोदन हेतु प्रस्तुत करने से पहले यथोचित तरीके से शामिल किया जा रहा है।

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